मुख : हिन्दी : आलोक : नौ दो ग्यारह : बैठ गया

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21.6.05

बैठ गया

कम से कम परम वालों से तो कुछ बेहतर होने की उम्मीद थी। पर वो तो कहेंगे कि दूसरा विभाग है। पर उम्मीद में नौ दो ग्यारह होते हैं। दुनिया कायम है तो हम भी करेंगे।
12:07 बजे आलोक द्वारा।
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Blogger आलोक ने अर्ज़ किया है...
पहुँच गया अन्दर - कमाल का भण्डार है। जय सीडॅक। आज भी चैन की नींद आएगी।
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