मुख : हिन्दी : आलोक : नौ दो ग्यारह : क्स्लिफ़्फ: क्या आप अनुवाद करते हैं?

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23.6.05

क्स्लिफ़्फ: क्या आप अनुवाद करते हैं?

तो डर के नौ दो ग्यारह होने की ज़रूरत नहीं है। आजमाया नहीं है पर जालस्थलों का अनुवाद करने के लिए काम की चीज़ लगती है। विण्डोज़ और यूनिक्स व अन्य दोनों के लिए उपलब्ध है। बेटे - यानी सन, की पैदाइश है। नाम तो ऐसा है कि बोला ही न जाए। क्स्लिफ़्फ। उफ़्फ। पर पहले तो मैं यह जानना चाहता हूँ कि बन्दे ने सोलारिस पे ये डेमो कैसे बनाया।
15:07 बजे आलोक द्वारा।
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