देखो, शब्द कहीं से लो, अरबी, फारसी, पंजाबी, गुजराती, अंग्रेजी कहीं का हो, ख्याल रहे कि ख्यालात का तसब्बुर और ज़वान की रवानगी ........ भाषा की प्रवहमानता और विचारों का क्रम बना रहे।
- —प्रेमचन्द
[उपेन्द्रनाथ अश्क को लिखे पत्र से साभार]
तसव्वुर, रवानगी - शूँ छे?
विचार कुंज से साभार।
लेबल: लेखन-शैली
14:27 बजे आलोक द्वारा।
5 छींटाकसी
इस लेख के हवाले
हम बंद किये आंख तसव्वुर में पड़े हैं
ऐसे में कोई छ्म से आ जाये तो क्या हो।
-रियाज़ खैराबादी
रवानगी=प्रवाह,गति,तीक्ष्णता
रेत की लहरों से दरीया की रवानी मांगे
मैं वो प्यासा हूं जो सहाराऒं से पानी मांगे।
-शाहिद कबीर
जवान नहीं जबान (भाषा)सही शब्द है। :)