न न, नेपाली होने में कोई बुराई नहीं पर जब कोई दुनिया को बताना चाहे कि हमें हिंदी की सामग्री परोसी जाए, तो थोड़ी दिक्कत होती है। यकायक सोचा कि पता लगाएँ, नया हिंदी वाला फ़ायर्फ़ाक्स दुनिया को मेरी भाषा के बारे में क्या बताता है - पता लगाने एक सरल तरीका है इस पन्ने पर मौजूद जानकारी। इसने कहा,
Mozilla/5.0 (Macintosh; U; Intel Mac OS X 10.4; hi-IN; rv:1.9.0.5) Gecko/2008120121 Firefox/3.0.5 200
यानी फ़ायर्फ़ाक्स ३.०.५ चल रहा है, सेब १०.४ पर, और भाषा हिंदी है।
ठीक है। अब देखा कि सफ़ारी पर क्या दिखाता है, और अचरज हुआ।
Mozilla/5.0 (Macintosh; U; Intel Mac OS X 10_4_11; ne-np) AppleWebKit/525.18 (KHTML, like Gecko) Version/3.1.2 Safari/525.22 200
बता रहा है कि सफ़ारी ३.१.२ चल रहा है, सेब १०.४.११ पर, और भाषा है नेपाली! आँय, यह कैसे हुआ, तो अपन गए अपने सेब की सिस्टम प्रिफ़रेंसेज़ में, इंटर्नेशनल के अंदर, और पाया यह।
ये भाषाएँ जोड़ी तो मैंने ही थीं, पर अकारादिक्रम में, और यह नहीं पता था कि एक के बाद एक आकलन कर के भाषा भेजी जाती है, इसी क्रम में। चुनाँचे इसे बदल के कर दिया ऐसे -
अब सफ़ारी मियाँ क्या कहते हैं?
Mozilla/5.0 (Macintosh; U; Intel Mac OS X 10_4_11; hi-in) AppleWebKit/525.18 (KHTML, like Gecko) Version/3.1.2 Safari/525.22 200
यानी कि नेपाली नौ दो ग्यारह और हिंदी हाज़िर।
लेकिन सवाल तो पैदा हो ही गया न एक और। कि फ़ायर्फ़ाक्स हिन्दी कैसे दिखा रहा था, उसने भी नेपाली क्यों नहीं दिखाई? उसका कारण यह है कि फ़ायर्फ़ाक्स सेब, बिल्लू और लिनक्स तीनों पर चलने वाला, वह सेब की जमावट का लिहाज़ नहीं करता, उसे सही कपड़े पहनाने के लिए "वरीयता..." में जा के भाषाओं का क्रमांकन चुनना होता है।
इसमें एक समस्या है, "ऊपर जाएँ" और "नीचे जाएँ" के बजाय "ऊपर ले जाएँ" और "नीचे ले जाएँ" होना चाहिए। लोमड़ी के अभिभावक को बता दिया गया है।
अब आप बताएँ, कि आपने अपने ब्राउज़र को कौन सी भाषा के कपड़े पहनाएँ हैं? जाँचें यहाँ और बताएँ।
इस जानकारी को सेब वाले पन्ने पर भी डाल दिया है।
लेबल: सेब
10:01 बजे आलोक द्वारा।विस्फोट के विस्फोटित होने के बाद का लावा अभी ठण्डा नहीं हुआ है, गुत्थी सुलझती नहीं लग रही है, शायद कुछ और सामने आए।
तब तक देखते हैं कि सेब पर बेतार टाटा इण्डिकॉम (वही काजोल वाला) कैसे लागू किया जा सकता है। अगर आप सेब का इस्तेमाल नहीं करते, या आपके पास ब्रोडबैंड है, तो आपको इस लेख को पढ़ के कुछ खास मिलेगा नहीं। यह लेख ऑन्लाइन गरीबी रेखा से नीचे वालों के लिए है। हाँ सेब की लुभावनी तस्वीरें आप फिर भी देख सकते हैं।
सबसे पहले तो आपको टाटा इण्डिकॉम का प्लग टु सर्फ़ खरीदना होगा। उस खरीद फ़रोख्त के पचड़े में नहीं पड़ रहा हूँ, मान के चलते हैं कि वह आपके पास पहले है। न हो तो बताएँ। यह प्लग टु सर्फ़ सिर्फ़ एक बेतार यूऍसबी मॉडेम है, जो कि कुछ कुछ तम्बाखू और चूना रखने की डिब्बी के आकार का होता है, काले रंग की प्लास्टिक का। इसका ढक्कन खोल के यूऍसबी का सिरा चालू सेब में घुसेड़ें।
आपको यह सन्देश दिखना चाहिए। अगर नहीं दिख रहा तो इसका मतलब है कि आपकी डिब्बी में कुछ गड़बड़ी है, किसी विण्डोज़ मशीन में (जिसमें सीडी स्थापित हो) लगा के जाँच लें।
इसके बाद आप सिस्टम प्रिफ़रेंसे़ के अन्तर्गत नेट्वर्क में जाएँ।
यहाँ पर लोकेशन के बगल वाले बक्से पर चटकाने पर आपको क्वाल्कॉम का विकल्प भी दिखेगा। उसे चुन लें।
आपसे नाम पूछा जाएगा, अपनी पसन्द का नाम दें।
इसके बाद, प्रयोक्ता नाम, internet, कूटशब्द भी internet और फ़ोन नंबर #777 दें। हर डिबिया के लिए यही नाम,नम्बर हैं, कुछ अलग नहीं है।
शो मॉडम स्टेटस इन मीनू बार पर सही का निशान लगाएँ।
बस काम हो गया। अब, जब भी काम चालू करना हो, ऊपर लगे फोन पर चटका लगा के चालू करें और इच्छानुसार बन्द करें।
यह है भी काफ़ी तेज़, ब्रोड्बैण्ड से कुछ ही कम धीमा है। सेवा काफ़ी पसन्द आई। आप भी आजमा के देखें, मतलब अगर मेरी तरह मजबूर हों तो। विण्डोज़ और लिनक्स के निर्देश और सीडी तो इसके साथ ही आते हैं, लिनक्स पर मैंने अभी आजमाया नहीं है।
उपरोक्त जानकारी मुझे विष्णु से मिली, उन्हें धन्यवाद।
अन्ततः विस्फोट के विस्फोट के बारे में फिर से - आप में से जिन्होंने भी विस्फोट वाले मसले पर अपनी राय दी है उन सबको धन्यवाद। यह निश्चित है कि "विरोधी संकलक" का संचालक होने के नाते मेरी हर बात उसी चश्मे से देखी जाएगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जो मैं सही समझता हूँ, वह न कहूँ। पुनः धन्यवाद। उसके बारे में फिर।
लेबल: सेब
10:50 बजे आलोक द्वारा।
18:33 बजे आलोक द्वारा।
बदल कर जापानी करनी पड़ी, सेटिंग्स -> प्रारूपण में जा कर।

लेबल: सेब
19:31 बजे आलोक द्वारा।
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