हैं भई हैं, ये क्या है जी?
फ़ायर्फ़ाक्स तो चढ़ा लिया, लेकिन ये छोटे बच्चे की तरह क्या बिलबिला रहा है?
आपने फ़ॉयरफ़ॉक्स के नवीनतम संस्करण से अद्यतन किया गया गया है?ये क्या बात हुई। शायद कहना चाहते थे कि
आपने फ़ायर्फ़ाक्स का अद्यतन कर नवीनतम संस्करण पा लिया है।
उसके बाद कहते हैं कि
आपके समय के लिए शुक्रिया!हाँ, यह ठीक है, पर आमतौर पर लोग यह कहते हैं,
अपना समय देने के लिए शुक्रिया!
और तो और, यह लूमड़ यह भी कह रहा है,
इस बंद बटन पर इस टैब पर अपने होम पेज जाने के लिए क्लिक करेंशायद कहना चाहता था,
अपने मुखपृष्ठ पर जाने के लिए इस खाँचे को बंद करने वाली कुंजी पर चटका लगाएँ।
और यह कहते हैं,
हजारों विशेषज्ञों की दुनिया भर के समुदाय हर दिन आपकी ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में नवीनतम खतरों से लड़ने के लिए काम कर रहे हैं.शायद यह कहना चाह रहे थे,
दुनिया भर के विशेषज्ञों के हज़ारों समुदाय हर दिन आपकी ऑन्लाइन सुरक्षा पर होने वाले नायाब हमलों से लड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं।
और,
हमारे आरंभ करें पृष्ठ का भ्रमण करें यह जानने के लिए कि आप अपने फॉ़यरफॉ़क्स का अधिक से अधिक कैसे लाभ पा सकेंगे.अंग्रेज़ी में यह अच्छा लगता पर हिंदी में यह बेहतर -
फ़ायर्फ़ाक्स का अधिक से अधिक लाभ पाने के बारे में जानने के लिए हमारे "आरंभ करें" वाले पन्ने पर जाएँ।
और रिलीज़ नोट्स यानी वितरण सूचना।
और सबसे बड़ी बात, फ़ायर के फ़ा का उच्चारण फ़ॉ नहीं होता है, इसलिए फ़ के ऊपर चंद्र नहीं होना चाहिए।
इस लोमड़ी के छोटे बच्चे के अभिभावक लूमड़ बाबा को सूचित कर दिया है। निश्चित रूप से वे और भी बेहतर बना सकेंगे अपने लूमड़ को, हम क्या चीज़ हैं।
आपकी राय?
लेबल: क्षेत्रीयकरण, तकनीक, फ़ायर्फ़ाक्स
10:34 बजे आलोक द्वारा।
यूँ तो आधा स लिखने की परंपरा नहीं है लेकिन व्याकरण की दृष्टि से गलत भी नहीं है। बहरहाल उम्मीद है कि गूगल वाले इसे जल्द ठीक कर देंगे।
तब तक खोज के लिए दो बार कंट्रोल दबाएँ।
यह रहा गूगल डेस्कटॉप का हिन्दी जालस्थल - कैसा लगा आपको? आजमा के बताएँ।लेबल: क्षेत्रीयकरण, खोज, गूगल, तकनीक
12:10 बजे आलोक द्वारा।लेबल: क्षेत्रीयकरण, तकनीक
16:36 बजे आलोक द्वारा।
लेबल: अनुवाद, क्षेत्रीयकरण, तकनीक
17:53 बजे आलोक द्वारा।
यानी ब्लॉग्स ऑफ़ नोट। करारे नोटों वाले नहीं, वरन उल्लेखनीय चिट्ठे :)
और यह लिंग माले में है - वह भी बिना वीज़ा के।
गूगल भइया को इसके बारे में संदेश लिख दिया है। देखते हैं कितनी जल्दी ठीक होता है।लेबल: अनुवाद-त्रुटि, क्षेत्रीयकरण, तकनीकी, भारतीयकरण, संगणक
08:20 बजे आलोक द्वारा।
हाँ, नीचे और भी हैं।
इतनी अपठित इसलिए रह गईं क्योंकि मेरी छन्नियाँ इस प्रकार की हैं कि चिप्पी लगाने के साथ साथ, इन संदेशों के लिए इनबॉक्स छोड़ें का विकल्प भी चुना गया था।
नतीजा यह कि चिप्पियों में तो अपठित डाक की संख्या लगातार बढ़ रही थी, लेकिन डाक खोलने पर डाक पेटी में संदेश इक्का दुक्का ही रहते थे। साथ ही, ज़्यादा डाक इकट्ठी करने से जीमेल को कोई दिक्कत नहीं है। याहू डाक की तरह ऊपर लाल खतरे का निशान नहीं आता है। साथ ही, अगर चिप्पियाँ ज़्यादा हों तो डाक खोलने पर सामने सामने अपठित की संख्या नहीं दिखती है, क्योंकि वह नीचे छिप जाती हैं। तो जिस प्रकार दीमक अंदर ही अंदर से लकड़ी को खोखला कर देती है, उसी प्रकार, मेरे अपठित संदेशों की संख्या हज़ार के करीब पहुँच गई। यह सब पिछले छः महीने में हुआ।
इसके मुझे कई खामियाजे भी भुगतने पड़े हैं - चिप्पी तो लगी है, अब एक-एक चिप्पी से शुरू करें तो आप शायद दूसरी चिप्पी लगी ताज़ी - और शायद ज़्यादा ज़रूरी डाक - को देर से पढ़ें। इसका आज एक निदान सोचा।
पहले तो सभी छन्नों से "इनबॉक्स छोड़ें" का विकल्प हटा दिया। इससे चिप्पी तो लगी रहेगी, लेकिन समयक्रम के अनुसार नए संदेश डाकपेटी में भी दिखेंगे।
दूसरा, हर चिप्पी के अपठित संदेशों को वापस डाकपेटी में ले आया।
नतीजा यह हुआ कि चिप्पियों के तहत अपठित तो हैं ही, साथ ही डाक पेटी में भी संख्या आ गई है, और सारी अपठित डाक नज़रों के सामने समयक्रम के अनुसार दिख रही है।
तो थोड़ी सुविधा तो हो ही गई है। वैसे मैं ज़रूरत से ज़्यादा लापरवाह हूँ, पर यदि आपको इसी प्रकार की समस्या हो - डाक पढ़ना टरकाने की - तो मेरा सुझाव है कि चिप्पियाँ तो लगाएँ, लेकिन संग्रहीत न करें।
साथ ही कुछ मीन मेख। आप देखेंगे कि तारांकित ठीक से नहीं लिखा आया है। इसी तरह यहाँ ज़बर्दस्ती खिंचाव पैदा किया गया है -
गूगल वालों को चिट्ठी लिखनी पड़ेगी। अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह।लेबल: क्षेत्रीयकरण, जीमेल, डाक-आयोजन, भारतीयकरण
18:04 बजे आलोक द्वारा।
लेकिन लगता है कि मुख पृष्ठ के अलावा और चीज़ों का अनुवाद अभी नहीं हुआ है। अरे नहीं, मैं गलत था।
सत्रारम्भ करने के बाद यह पन्ना आता है, अङ्ग्रेज़ी में -
लेकिन इसी पन्ने पर बदल के हिन्दी किया जा सकता है -
और यह रही इस बारे में गूगल की ओर से ही सूचना।
तो इन्तज़ार किस बात का है? भाषा बदलिए और आनन्द लीजिए।लेबल: उपकरण, क्षेत्रीयकरण, ब्लॉगर
14:02 बजे आलोक द्वारा।
© Alok Kumar alok at devanaagarii dot net, 2002-2012, सीऍसऍस © डब्ल्यू ३ सी .