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Can't see Hindi?

Why can't I see the Hindi section?

19.1.10

गूगल आयो - में जायो?

अब सवाल यह है कि गूगल आयो में जायो कि नहीं।

पंजीकरण का खर्चा है २०,००० रुपए, और हो रहा है यह हो रहा है सैन फ़्रांसिस्को में, यानी आने जाने और रहने का खर्चा अलग।

सोचना पड़ेगा। वह भी १६ अप्रैल के पहले। इसलिए अब होते हैं नौ दो ग्यारह।

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20:20 बजे आलोक द्वारा।
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18.1.10

बीएसएनएल के एक ब्रॉडबैंड से कई कंप्यूटर / लैपटॉप जोड़ें

पिछले ७ दिनों से मैं ऑन्लाइन गरीबी रेखा के नीचे लोट रहा था।

हुआ क्या था?

शक तो यह है कि किसी महानुभाव ने मेरे खाते का कूटशब्द बदल दिया था - पर यह सिर्फ़ शक ही है। खैर सब कुछ कर करा के काम शुरू तो हो गया लेकिन बेतार वाला काम फिर भी चालू नहीं हो रहा था। आज जा के सब कुछ ठीक हुआ है तो यह है कुछ जानकारी, शायद किसी और के काम भी आए, निश्चित रूप से मेरे काम तो आएगी ही।

यह सब बीएसएनएल के ब्रॉडबैंड और WA3002G4 मॉडॅम के निर्देश हैं।

  1. मॉडम चालू कर दें और तार से कंप्यूटर को जोड़ दें।
  2. अब http://192.168.1.1 पर जाएँ, ब्राउज़र के जरिए
  3. यहाँ पर कूटशब्द माँगा जाएगा, जो आमतौर पर प्रयोक्ता नाम ही होता है। इसे बदल देना चाहिए - सुरक्षा की दृष्टि से। खैर आगे बढ़ेंगे तो आपको ऐसा कुछ दिखेगा - ब्रॉडबैंड-१
  4. इसके बाद, Advanced Setup | WAN में जा के पहली कतार के Edit पर चटका लगाएँ।
  5. यहाँ पर दें -
    • वीपीआई - ०
    • वीसीआई - ३५
    • एनेबल वीलॅन टॅगिंग - खाली छोड़ें
    • सर्विस कैटेगरी - यूबीआर विदाउट पीसीआर
    ब्रॉडबैंड-३ और आगे बढ़ें।
  6. अब, अगले पन्ने पर यह जानकारी दें -
    • कनेक्शन टाइप - पीपीपीओई
    • एन्कैप्सुलेशन मोड - एलएलसी/स्नैप-ब्रिजिंग
    ब्रॉडबैंड-४"/ और फिर आगे बढ़ें।
  7. अगले पन्ने पर यह जानकारी दें -
    • पीपीपी यूज़रनेम - अपना बीएसएऩएल प्रयोक्ता नाम डालें - बिना @bsnl.in के केवल अगला हिस्सा
    • पीपीपी पासवर्ड - अपना बीएसएनएल कूटशब्द डालें - ध्यान दें, आपको अपने राउटर का कूटशब्द भी बदल के रखना चाहिए वरना अगर किसी के हाथ राउटर लग गया तो उसके पास आपका बीएसएनएल कूटशब्द भी है!
    • ऑथेंटिकेशन मेथड - में AUTO रखें।
    • बाकी सब खाली छोड़ दें।
    ब्रॉडबैंड-५ फिर आगे बढ़ें।
  8. अगले पन्ने पर,
    • एनेबल नैट - पर सही का निशान लगाएँ
    • एनेबल फ़ायरवाल - पर सही का निशान लगाएँ
    • एनेबल आईजीएमपी मल्टीकास्ट - पर सही का निशान लगाएँ
    • एनेबल वैन सर्विस - पर सही का निशान लगाएँ
    • सर्विस नेम - pppoe_0_35_1 - या कुछ भी और चाहें तो रख सकते हैं।
    ब्रॉडबैंड-६ यह करने के बाद जमाव सँजो लें।
  9. अब अपने मॉडेम को रिबूट कर लें - यह ब्राउज़र से किया जा सकता है। बाईं पट्टी में अंतिम विकल्प यही है।
  10. अगर आप विंडोज़ एक्स पी पर हैं तो अपनी मशीन पर "शो ऑल कनेक्शंस" कर के लैन और ब्रिज को एक साथ चुनें (कंट्रोल दबाए रखें और दोनों पर एक एक कर के चटका लगाएँ। फिर दाँया चटका मार के ब्रिज का विकल्प चुनें। और फिर मशीन को भी रिबूट कर डालें। अगर आप सेब पर हैं तो यह सब करने की ज़रूरत नहीं है।

बस हो गया! अब, जब आपका मॉडम फिर से चालू होगा तो उसमें चार बत्तियाँ जलेंगी - एक लाल - बाईं तरफ़ - पॉवर की, फिर नारंगी-पीली - एडीएसएल सिग्नल की, फिर तीसरी हरी - इंटर्नेट की (यह आपका कूटशब्द इस्तेमाल करके जुड़ेगा और फिर हरा होगा) और आखिरी लैन की। और आप किसी भी कंप्यूटर के जरिए बेतार से इससे जुड़ सकते हैं। मॉडम चालू होने के ३-४ सेकिंड बाद वह खुद ही जाल से जुड़ जाएगा और अन्य कंप्यूटरों को अपने आप ही 192.168.1.* के तहत आईपी भी पकड़ा देगा।

उम्मीद है दाल चावल अगल कर लेंगे। कोई दिक्कत हो तो टिपियाएँ।

हम होते हैं नौ दो ग्यारह।

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18:47 बजे आलोक द्वारा।
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15.11.09

सेब पर मलयालम

पहले कुछ इतिहास। सेब का इस्तेमाल करने वालों को अमूमन बंगाली, मलयालम, कन्नड़ अक्षरों के बजाय डब्बे ही दिखते हैं - कम से कम सेब १०.४ तक तो। आइए देखते हैं मुद्रलिपियों का कुछ इतिहास -

  1. मुद्रलिपियों की दुनिया में ट्रू-टाइप (टीटीऍफ़) का विकास सेब वालों ने किया था। इसे इस्तेमाल करने की इजाज़त माइक्रोसॉफ़्ट - विंडोज़ वालों - ने भी सेब वालों से ली।
  2. टाइप १ (पोस्ट स्क्रिप्ट) प्रारूप की मुद्रलिपियों का विकास अडोब बालों ने किया (वही पीडीएफ़ पाठक वाले)।
लेकिन सभी लिपियों के लिए उन्नत प्रदर्शन - खासतौर पर अरबी और भारतीय भाषाओं की लिपियों के लिए - ट्रूटाइप और पोस्ट स्क्रिप्ट पर्याप्त नहीं थे - टूटी मात्राओं वाली पुरानी मुद्रलिपियों से तो हम वाकिफ़ हैं ही। अतः कुछ समय बाद माइक्रोसॉफ़्ट ने सेब वालों की नई तकनीक - जीएक्स टाइपोग्राफ़ी - में साझेदारी करने की कोशिश की - लेकिन बातचीत ने सफल होने से पहले ही दम तोड़ दिया।
नतीजा यह हुआ कि माइक्रोसॉफ़्ट और अडोब ने पहले अलग अलग और फिर मिल के अपनी तकनीक को प्रोत्साहन दिया, उसे ट्रूटाइप ओपन - या ओपन टाइप कहा जाता था। आज की तारीख में आप जो रघु, मंगल, संस्कृत २००३, सुरेख आदि मुद्रलिपियों का इस्तेमाल करते हैं वे ओपन टाइप ही हैं। ये या तो .टीटीएफ़ होती हैं या .ओटीएफ़।
कुछ समय बाद माइक्रोसॉफ़्ट और अडोब ने ओपन टाइप को खुला मानक बनाने की पहल की - यानी केवल वे दो ही नहीं अपितु कोई भी उस मानक के आधार पर मुद्रलिपि बना सकता है और मान के आधार पर कोई भी संगठन मुद्रलिपि पर सही की मोहर लगा सकता है - इसके लिए केवल इन दो कंपनियों का मोहताज रहने की ज़रूरत नहीं।
नतीजा यह कि ओपनटाइप मुद्रलिपियों की बाढ़ सी आ गई। ध्यान दें कि केवल देवनागरी ही नहीं बल्कि रोमन में भी कई बेहतर किस्म के संयुक्ताक्षर - जैसे कि हस्तलेखन वाली मुद्रलिपियाँ - ओपनटाइप के जरिए बनाई जा सकती हैं।
लेकिन अब सेब वाले कहाँ रह गए? भई उनकी तकनीक तो उन्नत थी ही - शायद अब भी ओपनटाइप से बेहतर हो - जीएक्स टाइपोग्राफ़ी - जिसकी मालिकियत सेब के पास थी - अब तक एएटी - एप्पल एड्वांस्ड टाइपोग्राफ़ी - बन चुकी थी, और यह भी देवनागरी, अरबी संयुक्ताक्षर आदि प्रदर्शित करने की क्षमता रखती थी -लेकिन अब दो "मानक" हो गए - एक सेब का अपना - जो सिर्फ़ सेब पर ही चलता - और दूसरा ओपन टाइप - जिसका मुक्त मानक था, यह विंडोज़, लिनक्स आदि पर बखूबी चल रहा था।
यानी, जब तक आपके पास सेब के लिए एएटी वाली मुद्रलिपि न हो आपको देवनागरी/अरबी /मलयालम ठीक से नहीं दिखेगी।
इतिहास का पाठ समाप्त हुआ, अब वर्तमान में आते हैं।

अब अगर आपकी न सेब में दिलचस्पी हो और न ही मलयालम में फिर भी यह जानकारी काम की है।

काम की इसलिए कि मॅकमलयालम वालों ने विंडोज़लिनक्स पर चलने वाली ओपनटाइप मुद्रलिपियों को सेब पर चलाने के लिए परिवर्तित करने में सफलता पाई है।

इसीलिए तो लिनक्स और विंडोज़ वाली मलयालम मुद्रलिपियों में से एक, रचना मलयालम, अब सेब की आत्सुई (एटीएसयूई) - ऍप्प्ल टाइपोग्राफ़ी सर्विसेज़ फॉर यूनिकोड इमेजिंग में भी उपलब्ध है।

अर्थात् सरल शब्दों में - देवनागरी की यूनिकोडित मुद्रलिपियों को सेब में इस्तेमाल करने के लिए रास्ता साफ़ है। अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह।

अगर आपके पास सेब है और मलयालम में भी दिलचस्पी है तो मॅकमलयालम का आनंद उठाएँ। अगर आप अपने विचरक की मलयालम जाँचना चाहें तो विकिपीडिया या ट्विटर के मलयालम हिस्सों को देख कर जाँचें।

कुछ भविष्य के बारे में।

सेब वाले भी अब धीरे धीरे ओपनटाइप को अपना रहे हैं। सेब १०.५ में अरबी प्रदर्शन के लिए ओपन टाइप मुद्रलिपियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। संभव है कि सेब वाले कुछ मामलों में सीधे ओपन टाइप का ही इस्तेमाल करना पसंद करें - क्योंकि यह अब पका पकाया माल है, और इतनी सारी मुद्रलिपियाँ ओपन टाइप की पहले ही हैं।

दूसरी बात यह - जो वर्तमान के संदर्भ में कही - ओपन टाइप मुद्रलिपियों को एएटी में परिवर्तित करने का मार्ग प्रशस्त है - जैसे कि इस मलयालम मुद्रलिपि में। इसका भी लाभ सेब के प्रयोक्ता उठा पाएँगे।

सीख यह - उन्नत तकनीक पैदा करो, और फिर सही समय तक कमाई करने के बाद - दुह लेने के बाद उसे मानक बनने के लिए खुला छोड़ दो। नहीं छोड़ोगे तो कोई और बाजी मार ले सकता है। हमारी भारत सरकार ने इस्की के जरिए एक-बाइटीय उन्नत मुद्रलिपियाँ तो पैदा कीं, लेकिन उसे मुक्त मानक न बनाया - इससे भारतीय भाषाओं का संगणन आराम से १०-१५ साल पीछे हो गया - जब तक यूनिकोड न आया तब तक हमें अपने बिल में छिपा ही रहना पड़ा - पर चुगे हुए खेत का रोना न रोते हुए हम नौ दो ग्यारह होते हैं।

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14:40 बजे आलोक द्वारा।
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22.10.09

विकिस्रोत वालों की पीडीएफ़ में पंगे

विकिपीडिया वालों का ही प्रकल्प है विकिस्रोत - जहाँ पर आप किसी भी किताब का स्रोत - यानी मसाला - डाल सकते हैं और फिर उसे पीडीएफ़ या ओपनऑफ़िस प्रारूप में उतार सकते हैं।

उनके पीडीएफ़ बनाने वाले तंत्रांश में देवनागरी संयुक्ताक्षर ठीक से नहीं बनते हैं। इसका ब्यौरा दिया था, अब शायद ठीक करने का काम शुरू हो गया है।

पंगा mwlib नाम की लाइब्रेरी में है।

बढ़िया है। आशा है यह त्रुटि शीघ्र ही नौ दो ग्यारह होगी।

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03:28 बजे आलोक द्वारा।
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1.10.09

गूगल ऐप इंजन का मुख पृष्ठ हिन्दी में

आज गूगल ऐप इंजन का पन्ना खोला तो पाया कि सत्रारंभ पृष्ठ हिन्दी में है। बढ़िया है। वैसे सत्रारंभ करने के बाद तो सब कुछ अंग्रेज़ी में ही आता है। गूगल ऐप इंजन वैसे यह ऐप इंजन है क्या? जैसे गूगल का ब्लॉग्स्पॉट है, वैसे ही ऐप्स्पॉट भी है। ब्लॉग्स्पॉट पर चिट्ठों में लेख लिखे जा सकते हैं, और ऐप्स्पॉट पर पाइथन या जावा नामक प्रोग्रामिंग भाषाओं के जरिए कुछ मज़ेदार चीज़ें बनाई जा सकती हैं, जैसे कि स्टिकी, या और भी ढेर सारे मज़ेदार या उपयोगी स्थल। और जानकारी के लिए गूगल कूट का ऐप इंजन स्थल बढ़िया है, लेकिन ये फ़िलहाल केवल अंग्रेज़ी, रूसी, स्पेनिश, चीनी, जापानी, कोरियाई, पुर्तगाली में ही उपलब्ध है, हिन्दी में नहीं। मेरे कुछ प्रिय स्थल हैं स्टिकी और मॉडरेटर, इसके अलावा ट्विटर संबंधी कई स्थल भी ऐप्स्पॉट पर उपलब्ध हैं।

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04:38 बजे आलोक द्वारा।
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12.8.09

ब्लैकबेरी में हिन्दी नहीं, काला बेर बना काला पत्थर

अपने अन्नदाता ने कुछ रोज़ पहले एक ब्लैकबेरी प्रदान किया है। काफ़ी दिलचस्प चीज़ है, जिसे दफ़्तर में काम नहीं करना सिर्फ़ चौधराहट ही दिखानी है उसके लिए दफ़्तर से कम नहीं है। लेकिन इसमें एक ही दिक्कत है - फ़ोन में हिन्दी प्रदर्शन के एवज में सिर्फ़ काले डब्बे दिखते हैं! इस लिहाज़ से देखा जाए तो आपने लिए यह काला बेर काले पत्थर के बराबर ही है।

चुनांचे मैं अपना नोकिया २६२६ भी रखा हुआ है ताकि चलते फ़िरते कतारों में खड़े शौक फ़रमाया जा सके। क्या करें, कुछ नवाबों को लौंडो का शौक होता है, और मेरे जैसे कुछ नाचीज़ किस्म के लोगों को कारखानों में बने सामान पर खड़खड़ाने का। देखा कि करुण वासुदेव कुछ खोजबीन कर रहे हैं इस बारे में। उम्मीद है नतीज़ा जल्द आएगा।

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20:09 बजे आलोक द्वारा।
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6.8.09

यूट्यूब अब हिन्दी में

ताज़ी खबर है कि गूगल का यूट्यूब अब हिन्दी में भी है।

यूट्यूब-हिन्दी

उदाहरण के लिए, चंडीगढ़ से संबंधित वीडियो पाने के लिए आप जब यूट्यूब पर चंडीगढ़ की खोज करेंगे, तो आपको परिणाम हिन्दी में दिखेंगे -

यूट्यूब-चंडीगढ़

अगर आपको यूट्यूब हिन्दी में न दिख रहा हो तो यूट्यूब के पते के आगे "?hl=hi" लगा दें, ऐसे:

http://youtube.com?hl=hi

तो देखिए मस्त गाना यूट्यूब पर, हम होते हैं नौ दो ग्यारह!

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21:34 बजे आलोक द्वारा।
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27.7.09

अहा, जियोसिटीज़, और लिनक्स परिचय, और ब्लॉगर

जियोसिटीज़ वालों से संदेसा आया कि बंद होने वाला है। जो इसके बारे में नहीं जानते हैं बस इतना ही समझ लें कि यह अपने ज़माने का ब्लॉग्स्पॉट था। अंतर्जाल पर मेरा सबसे पहला स्थल जियोसिटीज़ पर ही था।

बंद तो होने वाला है, साथ ही कुछ दिन पहले रवि रतलामी जी ने अपनी लिनक्स की किताब के संबंध में लिनक्स परिचय के बारे में पूछा तो ध्यान आया कि यह भी तो जियोसिटीज़ पर ही है। इसे भी सितंबर २००९ के पहले कहीं और सरकाना होगा।

वैसे लिनक्स परिचय एक स्वयंसेवी अनुवाद कार्यक्रम है, आप भी इसमें शामिल हो सकते हैं। आज के दिन यह पन्ना पूर्ण किया, काफ़ी समय से आधा अनुवादित था। अनुवाद संबंधी त्रुटियाँ अवश्य जानकारी में लाएँ, अग्रिम आभाऱ।

वैसे सोचता हूँ कि जियोसिटीज़ ऑर ब्लॉग्स्पॉट में एक वाक्य में फ़र्क बताना हो तो कैसे बताएँ? शायद ऐसे, कि जियोसिटीज़ में आदान प्रदान की इकाई एक फ़ाइल थी, जबकि ब्लॉगर में यह इकाई एक लेख है।

अब हम होते हैं नौ दे ग्यारह, आज की असली दुनिया में घुसने से पहले तलवारें पैनी करनी हैं।

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06:07 बजे आलोक द्वारा।
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22.6.09

ऍज़्यूर की जानकारी तमिळ में

बिल्लू भाई तमिळ सीख चुके हैं! यह जालनाद अंग्रेज़ी और तमिळ दोनो में है। ज़्यादा नहीं आती है और इस पर काम भी नहीं करता हूँ पर कोशिश रहेगी कि इसे देख/सुन सकूँ। २२ जून २००९ को चार बजे शाम को।

अपने तमिळ भाइयों और उनकी भाभियों को बताना न भूलिएगा

धत्तेरेकी! साले ब्लॉगर.कॉम का हरकारा ऐन वक़्त पर नौ दो ग्यारह हो गया, इसे सही समय पर छापा ही नहीं। भाइयों और भाभियों को माफ़ी। अब खुद छाप रहा हूँ, पर उम्मीद है कि ऐसे मौके और भी आते रहेंगे।

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20:30 बजे आलोक द्वारा।
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18.6.09

सिल्पा

सिल्पा यानी संतोष तोट्टिङ्गल की स्वतंत्र इंडियन लैंग्वेज प्रोसेसिंग ऍप्लिकेशंस। बड़ा सोच समझ के सिल्पा नाम रखा है!

सारा माल पाइथन में हैं - साँप नहीं प्रोग्रामिंग भाषा पाइथन में। कोई नहीं, अपने को भी नहीं आती, पर आप और मैं यहाँ पर इसका परीक्षण कर सकते हैं जैसे कि क्रमांकन, लिप्यंतरण, भाषा अनुमानक और न जाने क्या क्या

और अगर कुछ सही न चलता दिखे तो नौ दो ग्यारह होने से पहले संतोष को डाक भेज दें। यही तो मकसद था बताने का! http://smc.org.in/silpa

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17:11 बजे आलोक द्वारा।
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4.6.09

ये ट्विटर क्या बला है? आप भी ट्वैटर्य को प्राप्त हों

जान ही लीजिए अगर न जानते हों तो - अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह।

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05:11 बजे आलोक द्वारा।
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31.5.09

अब से अपने नौ दो ग्यारह के लेख सीधे ट्विटर पर भी छपेंगे

यह सिर्फ़ देखने के लिए कि twitter.chitthajagat.in मेरे नए लेख @alok पर छाप पाता है कि वैसे ही नौ दो ग्यारह हो जाता है। हाँ आप तो यही कहेंगे कि इसी बहाने मैंने कुछ लिखा तो सही! पर कमी बहानों की है नहीं। पापी पेट का सवाल है।

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08:24 बजे आलोक द्वारा।
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24.1.09

हाई फ़ाइव वाले हिंदी में शुरू

वैसे तो इन हाई-फ़ाइव वालों से मैं बहुत परेशान ही हूँ क्योंकि जान न पहचान वाले हिसाब से खाता खोलने के संदेसे आते रहते हैं, लेकिन आज तो गज़ब हो गया, जब हिंदी में संदेसा आया -

तो पता चला कि इन्होंने वाकई सब कुछ हिंदी में कर रखा है। मज़ा आ गया।

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13:10 बजे आलोक द्वारा।
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4.1.09

अहो भाग्य

अपने गाँव ढकोली वाले घर में लग गया ब्रॉडबैंड आज के दिन। मज़ा आ गया। अब इस बहुमूल्य बैंडविड्थ रूपी पेट्रोल को मैं भी यूट्यूब, ट्विटर, चिट्ठाचर्चा, चिट्ठाजगत यानी ऑन्लाइन मटरगश्ती में बरबाद कर सकता हूँ।

अहो भाग्य हमारे कि भारत के उन पचास लाख सौभाग्यशालियों में शामिल हुए।

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17:00 बजे आलोक द्वारा।
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23.12.08

फ़ायर्फ़ाक्स में एक गड़बड़, पर सिर्फ़ सेब पर, मतदान करें

अगर आप यह पन्ना देखेंगे, तो शायद आपको ठीक दिख रहा हो, पर मुझे ऐसे दिख रहा है। बाईं तरफ़ सफ़ारी में और दाईं तरफ़ फ़ायर्फ़ाक्स में।

इसे ठीक करवाने के लिए फ़ायर्फ़ाक्स को ब्यौरा दे दिया है। आपसे अनुरोध है कि इस दिक्कत को जल्दी ठीक करवाने के लिए मतदान करें

मतदान करने के लिए

  1. https://bugzilla.mozilla.org/show_bug.cgi?id=470593 पर जाएँ
  2. वहाँ लिखे (vote) पर चटका लगाएँ
  3. अपना मत दर्ज करें
धन्यवाद!

आपको कोई और दिक्कत आई फ़ायर्फ़ाक्स पर?

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10:16 बजे आलोक द्वारा।
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21.12.08

आपने फॉ़यरफॉ़क्स के नवीनतम संस्करण से अद्यतन किया गया है.

हैं भई हैं, ये क्या है जी?

फ़ायर्फ़ाक्स तो चढ़ा लिया, लेकिन ये छोटे बच्चे की तरह क्या बिलबिला रहा है?

आपने फ़ॉयरफ़ॉक्स के नवीनतम संस्करण से अद्यतन किया गया गया है?
ये क्या बात हुई। शायद कहना चाहते थे कि
आपने फ़ायर्फ़ाक्स का अद्यतन कर नवीनतम संस्करण पा लिया है।

उसके बाद कहते हैं कि

आपके समय के लिए शुक्रिया!
हाँ, यह ठीक है, पर आमतौर पर लोग यह कहते हैं,
अपना समय देने के लिए शुक्रिया!

और तो और, यह लूमड़ यह भी कह रहा है,

इस बंद बटन पर इस टैब पर अपने होम पेज जाने के लिए क्लिक करें
शायद कहना चाहता था,
अपने मुखपृष्ठ पर जाने के लिए इस खाँचे को बंद करने वाली कुंजी पर चटका लगाएँ।

और यह कहते हैं,

हजारों विशेषज्ञों की दुनिया भर के समुदाय हर दिन आपकी ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में नवीनतम खतरों से लड़ने के लिए काम कर रहे हैं.
शायद यह कहना चाह रहे थे,
दुनिया भर के विशेषज्ञों के हज़ारों समुदाय हर दिन आपकी ऑन्लाइन सुरक्षा पर होने वाले नायाब हमलों से लड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं।

और,

हमारे आरंभ करें पृष्ठ का भ्रमण करें यह जानने के लिए कि आप अपने फॉ़यरफॉ़क्स का अधिक से अधिक कैसे लाभ पा सकेंगे.
अंग्रेज़ी में यह अच्छा लगता पर हिंदी में यह बेहतर -
फ़ायर्फ़ाक्स का अधिक से अधिक लाभ पाने के बारे में जानने के लिए हमारे "आरंभ करें" वाले पन्ने पर जाएँ।

और रिलीज़ नोट्स यानी वितरण सूचना।

और सबसे बड़ी बात, फ़ायर के फ़ा का उच्चारण फ़ॉ नहीं होता है, इसलिए फ़ के ऊपर चंद्र नहीं होना चाहिए।

इस लोमड़ी के छोटे बच्चे के अभिभावक लूमड़ बाबा को सूचित कर दिया है। निश्चित रूप से वे और भी बेहतर बना सकेंगे अपने लूमड़ को, हम क्या चीज़ हैं।

आपकी राय?

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10:34 बजे आलोक द्वारा।
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20.12.08

फ़ायर्फ़ाक्स तो हिंदी में है ही, उसका मुखपृष्ठ भी।

अपनी पसंद की भाषा में फ़ायर्फ़ाक्स उतारिए, वह भी अपनी पसंद की भाषा के मुखपृष्ठ से!

  1. हिंदी, http://hi-in.www.mozilla.com/hi-IN/
  2. बंगाली, http://bn-in.www.mozilla.com/bn-IN/
  3. गुजराती, http://gu-in.www.mozilla.com/gu-IN/
  4. पंजाबी, http://pa-in.www.mozilla.com/pa-IN/
  5. सिंहली, http://si.www.mozilla.com/si/
है न मज़ेदार? इतना ही नहीं, हिंदी वाले क्रोम से http://firefox.com पर जाएँगे तो वह अपने आप हिंदी वाले स्थल की ओर ले जाएगा!

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10:26 बजे आलोक द्वारा।
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17.12.08

वर्तनी जाँचक और देवनागरी : स्वर / व्यंजन जो यूनिकोड में हैं पर संस्कृत में नहीं हैं

जब वर्तनी जाँचक के बजाय नुक्तों की बात छिड़ गई है तो आइए देखते हैं वह कौन से कूटबिंदु हैं जो यूनिकोड वाले देवनागरी के नाम पर मुहैय्या कराते हैं पर संस्कृत में प्रयुक्त देवनागरी वर्णमाला में नहीं हैं। (वास्तव में वर्तनी जाँचक के नज़रिए से देखें तो नुक्ता तो बहुत छोटा, अच्छी तरह परिभाषित मसला है, नुक्ता सहित जाँचें या बगैर - आसानी से किया जा सकता है - पर यह नीचे के ११ मसलों में से केवल एक ही है और सबसे आसानी से सुलझने वाला भी। )

  1. चंद्रबिंदु - जैसे कि चाँद में
  2. - यह स्वर मलयालम में बड़ा "ए" की तरह उच्चारित होता है। ध्यान दें यह ऐ (अ+इ सा उच्चारण), नहीं है। देवनागरी में केवल मलयालम आदि से लिप्यांतरण की सुविधा के लिए इसे शामिल किया गया है।
  3. - यह स्वर यूरोपियन भाषाओं के कुछ शब्दों को लिप्यंतरित करने के काम आता है जैसे, ऍक्लेयर, या ऍप्पल। ए का ए लंबा खींचने के बजाय ए और ऐ के बीच का स्वर।
  4. - जो ए के लिए ऍ है, वह आ के लिए ऑ है। जैसे कि ऑन, ऑफ़ आदि अंग्रेज़ी शब्दों के लिए।
  5. - यह भी मलयालम के बड़े ओ की तरह है, उच्चारण लंबे ओ की तरह होता है न कि औ(अ+उ) की तरह।
  6. ऩ य़ - यह न और य नहीं है, बल्कि तमिळ, मलयालम में एक और "न" और "य" होता है। इसका ठीक ठीक उच्चारण मुझे नहीं पता है लेकिन क्रमशः न और य जैसा ही होता है, मगर उनसे भिन्न।
  7. ऱ - यह मराठी में काम आता है जैसे कि दऱ्या जैसे शब्दों में।
  8. ऴ - यह ल, ळ की शृंखला में अगली कड़ी है। तमिळ, मलयालम में इसका प्रयोग होता है। मेरी जानकारी में, संस्कृत में इसका कोई समानोच्चारक नहीं है।
  9. क़ ख़ ग़ ज़ फ़ - नुक्तायुक्त शब्द। अरबी-फ़ारसी शब्दों के लिए।
  10. ड़ ढ़ - गाड़ी, बढ़ई
  11. ॻ ॼ ॽ ॾ ॿ - यह पाँच व्यंजन कश्मीरी और सिंधी में काम आते हैं। अगर आपको ये अपने पर्दे पर दिख नहीं रहे तो इसलिए कि ये यूनिकोड में नए जोड़े गए हैं। ये क्रमशः ग, ज, के नीचे लेटी लकीर के साथ, उल्टा ट, ड, ब के नीचे लेटी हुई लकीर के साथ लिखे जाते हैं। शायद रमण जी इनके बारे में बता पाएँ।

ज़ाहिर है कि संस्कृत(और हिंदी) इस यूनिकोड परिभाषित देवनागरी लिपि के एक अंश का ही प्रयोग करती हैं। वर्तनी जाँचकों और भाषा अनुमानकों को को भी इसका ध्यान रखना चाहिए।

और हमें होना चाहिए, नौ दो ग्यारह।

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10:49 बजे आलोक द्वारा।
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16.12.08

देवनागरी में शब्द लपेटना

अपन लोगों को तो पता ही है कि देवनागरी लिखते समय हम वास्तव में अक्षर दर अक्षर लिखते नहीं है। जैसे कि अक्षर शब्द को ही लें, अगर एक पंक्ति के अंत में जगह कम हो तो इसे लपेटने के लिए हम करेंगे

  1. अ-
    क्षर, या
  2. अक्ष-

पर बिचारे कंप्यूटर को यह कौन बताए कि अ, क, हलंत, ष और र से बना यह शब्द इन्हीं दो तरीकों से ही लपेटा जा सकता है - मतलब लपेटा तो और भी तरह से जा सकता है लेकिन सुविधाजनक यही दो हैं?

कंप्यूटर को यही सिखाने की कोशिश कर रहे हैं सन्तोष तोट्टिङ्गल। उन्होंने, एक शब्दभञ्जन कोष तैयार किया है, और उसके परीक्षण के लिए आमंत्रण दिया है।

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10:04 बजे आलोक द्वारा।
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11.12.08

इंस्क्रिप्ट सीखें - का भाग २

लीना मेहंडले द्वारा निर्मित इंस्क्रिप्ट प्रशिक्षक वीडियो का पहला भाग तो मिला था पर दूसरा नहीं।

यह था पहला भाग।

और यह है दूसरा भाग।

अगर आप अभ्यास करना चाहते हैं तो ये वीडियो काम के हैं।

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10:53 बजे आलोक द्वारा।
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24.11.08

कचरे में टिप्पणियाँ डालने का नया कीर्तिमान

वह भी एक दिन में पचास।

कचरा टिप्पणी

और उन्हें नौ दो ग्यारह करने का भी। चलो इस बहाने मैंने कुछ लिखा। अफ़सोस भी हुआ, कि इतने सालों से बे-छींटाकसी वाले लेखों पर १ की संख्या दिखने लगी, पर उसे फिर से सिफ़र पे लाना पड़ा!

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21:57 बजे आलोक द्वारा।
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27.9.08

गूगल के विज्ञापन - हिन्दी वाले - थरथराहट

सुधर जाओ, सालों

थरमसो के विशव निरमा विक्रेता,निरयात? ऍड्वर्ड्स वालों को अपनी छन्नी सुधारनी होगी। अंग्रेज़ी हिन्दी की खिचड़ी और अव्याकरणोपयुक्त माल। अंग्रेज़ी में नहीं चलता है पर हिन्दी में पेल रहे हैं। लगता है देखने वाला कोई नहीं है।

जय हिन्द। लूमीलाग्रो थर? थरथराहट।

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10:41 बजे आलोक द्वारा।
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19.8.08

गूगल पर बीजिंग २००८

तो गूगल वालों ने आज आपने शुभंकर पर चटका लगाने पर बीजिंग २००८ की खोज पर ले जाने का फ़ैसला किया है। बीजिंग २००८ ५०,४०० परिणाम मिलते हैं, "बीजिंग २००८" की खोज के, और २,५९,००० परिणाम मिलते हैं, "बीजिंग 2008" के, पदक तालिका समेत। हाँ, वरियताएं और शामील को ठीक करना अभी बाकी है।

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15:31 बजे आलोक द्वारा।
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25.7.08

गूगल टॉक में लिप्यन्तरण और अनुवाद

गूगल टॉक के जरिए लिप्यन्तरण करने की सुविधा - इस डाक पते को जोड़ें - en2hi.translit@bot.talk.google.com

गूगल टॉक लिप्यन्तरण

और फिर आजमाएँ -

गूगल टॉक लिप्यन्तरण उदाहरण

इसी तरह अनुवाद के लिए - en2hi@bot.talk.google.com

गूगल टॉक अनुवादक

और फिर आजमाएँ -

गूगल टॉक अनुवादक उदाहरण

इसी तरह कन्नड़, मलयालम, तमिल, तेलुगु के लिए भी हैं।

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11:57 बजे आलोक द्वारा।
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6.7.08

फ़ेसबुक

हर रोज़ ५०,००० नए सदस्य शामिल हो रहे हैं। ऑर्कुट से कुछ हटकर, मेरी राय में उससे बेहतर। ज़्यादा तेज़। गोपनीयता के लिहाज़ से बेहतर।

शामिल होने के लिए कड़ी

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12:49 बजे आलोक द्वारा।
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21.6.08

इंस्क्रिप्ट के जरिए हिन्दी लिखने के लिए सात मिनट दस सेकिंड का वीडियो

बड़े दिनों से - बल्कि सालों से सोच रहा था कि इंस्क्रिप्ट सिखाने का कोई आसान तरीका हो। इंस्क्रिप्ट है तो आसान पर जब तक आमने सामने बैठे न हों समझाना मुश्किल होता है कि यह कितना आसान है। शुक्र है संस्तुति जी का जिन्होंने यह वीडियो - नहीं व्हीडियो - तैयार किया - जो सात मिनट दस सेकिंड का है, और इसके जरिए ७ साल के बच्चे से ले के ७७ साल के जवाब तक आसानी से इंस्क्रिप्ट सीख सकते हैं।

यह लेख भी मैं इंस्क्रिप्ट के जरिए ही लिख रहा हूँ। दरअसल इंस्क्रिप्ट मुश्किल इसलिए लगता है क्योंकि हमें समझ नहीं आता है कि क k की जगह क्यों है और त l की जगह क्यों हैं। पहले पाँच मिनट इस व्हीडियो में संस्तुति जी यही समझाती हैं कि इंस्क्रिप्ट का जमाव जैसा है, वैसा क्यों है। वह यह भी समझाती हैं कि भारत की अलग अलग भाषाओं में टाइपराइटर के जमाव अलग अलग क्यों हुए, और हर भारतीय भाषा के लिए इंस्क्रिप्ट जमाव एक जैसा क्यों हैं, और इसके फ़ायदे क्या हैं।

संस्तुति जी अपने व्हीडियो का परिचय देते हुए कहती हैं -

अधिकतर भारतीय लेखक सभी भारतीय भाषाओं में टंकण करने के लिए एक आसान जुगाड़ नहीं जालते हैं -- आधे घंटे से कम में सीखें। इंस्क्रिप्ट का तरीका सीखिए, एक ही बार में। यह कुञ्जीपटल जमाव बिल्कुल सरल है। टंकण की कक्षाओं में जाने की ज़रूरत ही नहीं है।
मुझे लगता है कि इंस्क्रिप्ट के अधिक लोकप्रिय न होने का एक कारण यह भी रहा हो कि टंकण कक्षाओं वालों को इसमें कुछ फ़ायदा नहीं होता। जो चीज़ दो दिन में सिखाई जा सकती है उसके लिए काहे का कोर्स और कितने पैसे का कोर्स?

एक बार यह समझ आ जाए कि इंस्क्रिप्ट का जमाव जैसा है, वैसा क्यों है, फिर इंस्क्रिप्ट सीखने के लिए कोई शिक्षक, कोई कितबिया, कुछ नहीं चाहिए। बस लिखते जाएँ, और धीरे धीरे अपनी गति बढ़ाते जाएँ।

मुझे व्हीडियो का पहला भाग ही मिला है, यदि आपको अन्य भाग मिलें तो मुझे ज़रूर बताएँ।

यह लीजिए व्हीडियो।

व्हीडियो पर टिप्पणी करें

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14:26 बजे आलोक द्वारा।
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18.6.08

नया फ़ायर्फाक्स ३ पिछले १२ घंटे में ४१ लाख लोग डाउनलोड कर चुके हैं - आप भी करें - इसमें हिन्दी प्रदर्शन की सारी समस्याएँ सुलझ गई हैं।

मोज़िला की गिनती बता रही है कि पिछले बारह घंटे में ४१ लाख बार फ़ायर्फ़ाक्स ३ उतारा जा चुका है। यह इंटर्नेट एक्स्पलोरर, ऑपेरा और सफ़ारी की तरह ही एक ब्राउज़र है जो कि बिल्कुल मुफ़्त, बहुत तेज़ और हिन्दी प्रदर्शन अच्छी तरह करने वाला है।

 

मोज़िला वाले, जो फ़ायर्फ़ाक्स बनाते हैं – आज रात यानी १८-जून-२००८ साढ़े दस बजे आपको फ़ायर्फ़ाक्स उतारने का न्यौता दे रहे हैं।

 

वैसे उतार तो आप बाद में भी सकते हैं पर कीर्तिमान स्थापित करना है न २४ घंटे में अधिकाधिक लोगों द्वारा उतारने का!

 

रचना जी ने तो उतार लिया है, और वह कह रही हैं कि हिन्दी प्रदर्शन में फ़ायर्फ़ाक्स में जो पहले समस्याएँ थीं, वह अब दूर हो चुकी हैं। आप भी जाइए फ़ायर्फ़ाक्स के स्थल पर, और आजमाइए इसे।

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10:39 बजे आलोक द्वारा।
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फ़ायर्फ़ाक्स ३ उतारने का दिन आज है - १८-जून-२००८ - उतारें और हिन्दी प्रदर्शन की समस्याएँ हल करें

फ़ायर्फ़ाक्स ब्राउज़र का नया उद्धरण कल रात भारतीय समयानुसार साढ़े दस बजे उद्घाटित हुआ।

इसका इस्तेमाल करने में हिन्दी के पाठकों और लेखकों को कई फ़ायदे हैं। एक तो यह ज़्यादा तेज़ है, दूसरा आपकी पुराने फ़ायर्फ़ाक्स की टूलबार आदि भी यथावत चलेंगी, और तीसरी सबसे बड़ी बात, हिन्दी के प्रदर्शन में जो समस्याएँ यदा कदा फ़ायर्फ़ाक्स पर आती थीं, वह फ़ायर्फ़ाक्स ३ में बिल्कुल ठीक कर दी गई हैं। तो आप भी उतारिए फ़ायर्फ़ाक्स ३ आज ही -

फ़ायर्फ़ाक्स के आधिकारिक स्थल से एक चटके में डाउनलोड करें

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06:57 बजे आलोक द्वारा।
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11.6.08

गूगल सुझाव, टेक्नोलॉजी, अश्लीलता, और प्रयोक्ता का अनुभव - सुधारना आपके हाथ में है

यह शीर्षक आपको कुछ दिन पहले विनीत खरे जी के लेख के शीर्षक जैसा लगेगा, और यह इसलिए क्योंकि यह लेख उसी पान की दुकान वाले लेख से संबंधित है। इस "समस्या" को देखने के लिए आपको

  1. हिन्दी वाला गूगल लागू करना होगा, पर
  2. खोज अंग्रेज़ी अक्षर s से करनी होगी - वैसे आप स से करें तो भी परिणाम वही होगा :
यानी वयस्कोन्मुख सामग्री को इंगित करने वाले शब्द सुझाए जा रहे हैं।

यही हाल कुछ और अक्षरों की खोज करने पर होता है।

क से ले कर,

फ से ले कर

ब तक।

मेरे द्वारा ली गई तस्वीरें करीब एक महीने पुरानी हैं इसलिए हो सकता है कि आपको इस वक़्त कुछ और परिणाम मिलें।

वास्तव में यह खोज मैंने दफ़्तर में की थी, s से कुछ खोज कर रहा था - स से नहीं - और परिणामों के सुझाव आने लगे, उत्सुकता हुई और तस्वीरें सँजो के रख लीं।

यह है तो समस्या ही, आखिरकार सुझाव तो ठीक है पर देश और काल के आधार पर नैतिकता बदलती है कि नहीं?

विनीत जी का लेख देखने के बाद, और उसपर लिखी टिप्पणियों से यही लगा कि हाँ वास्तव में इन शब्दों की खोज अधिक होती है इसलिए यह सुझाव में आए हैं। कुछ लोगों ने इसे सहज भाव से लिया और कुछ ने नहीं, जैसे कि स्वयं विनीत जी ने।

और सहज भाव से न लेना भी स्वाभाविक ही है, यह भाषा और संस्कृति से इतर है, आप किसी गंभीर विषय पर खोज कर रहे हों और सुझाव ऐसे आने लगें, जब कि आसपास लोग भी बैठे हों तो कैसा रहेगा?

अंग्रेज़ी वाले गूगल में तो सुझाव हमेशा नहीं आते पर हिन्दी वाले में तो हमेशा आते हैं!

बस एक बार अंग्रेज़ी वाले गूगल के जरिए आजमा के देखा - http://google.com/webhp?complete=1&hl=en से अंग्रेज़ी वाले गूगल में सुझाव आते हैं।

और यही पाया कि, अंग्रेज़ी में गूगल अश्लील सुझाव खा गया,

जी हाँ बिल्कुल खा गया,

दुबारा खा गया -

यहाँ भी वयस्कोन्मुख सुझाव नहीं दिखे,

न यहाँ,

बिल्कुल भी नहीं,

यहाँ थोड़े हैं।

वास्तव में हो क्या रहा है? मैंने एक बार विकल्प में जा के वयस्कोन्मुख सामग्री न हटाने का विकल्प भी चुनने की कोशिश की - वयस्कोन्मुख सामग्री हटाने का विकल्प लागू नहीं था।

यानी क्या? यानी यह, कि गूगल ने मामले की संजीदगी को समझते हुए वयस्कोन्मुख और संभवतः आपत्तिजनक सुझाव हटा दिए हैं - अंग्रेज़ी के लिए कम से कम।

पर फिर हिन्दी में क्यों नहीं? शायद इसलिए कि अभी गूगल हिन्दी सीख रहा है। वैसे, शायद कुछ सुझाव हिन्दी में भी हटाए गए हैं, क्योंकि मैं चकित हुआ था कि च के लिए वयस्कोन्मुख सुझाव नहीं थे - मतलब कि यह बाला अभी हिन्दी सीख रही है!

विनीत जी ने बात बहुत वाजिब उठाई है, और इस वक़्त हिन्दी के लिए जो सुझाव गूगल पर दिख रहे हैं वह वास्तव में अपरिमार्जित हैं और खोज की आवृत्ति के आधार पर हैं, स्वचालित। लेकिन शायद आपत्तिजनक सुझावों को हटाने की प्रक्रिया अभी उतनी सशक्त नहीं हुई है। लेकिन यह प्रक्रिया मौजूद तो है - यह ज़ाहिर होता है च वाले सुझावों से। इस बारे में गूगल को लिख रहा हूँ, शायद वे इसे और सशक्त करने पर गौर करें।

पर तीन बातें अवश्य सामने आती हैं -

  1. अभी भी बहुत कम लोग गूगल के स्थल के हिन्दी उद्धरण का इस्तेमाल करते हैं। तभी यह मुद्दा अभी तक उछला नहीं। इस्तेमाल करिए - इसके लिए आप वरीयता या प्रिफ़रेंसेज़ में जा सकते हैं। गूगल वाले नज़र रखते हैं कि कौन सी भाषा के पन्नों का इस्तेमाल अधिक हो रहा है। हिन्दी के इस्तेमाल की संख्या बढ़ाइए। हिन्दी के जालस्थलों को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी आपकी है उनका इस्तेमाल करके, और उनपर प्रतिक्रिया दे के। इस काम में भारत सरकार या किसी देवी देवता का कोई जिम्मा नहीं है, यह उत्तरदायित्व आपका है।
  2. जिस व्यक्ति को हिन्दी टंकण आता है उसके लिए S अक्षर छापने पर देवनागरी के परिणाम दिखाना - मुझे तो नहीं जमता, अगर इसे वैकल्पिक बनाने की सुविधा हो तो अच्छा हो। वैसे सुझाव स से भी आते हैं। पर इस समय हिन्दी टंकण न जानने वालों की संख्या कम है अतः यह समस्या इस समय काफ़ी गौण है।
  3. गूगल वालों ने अपने मुख पृष्ठ पर वरीयताएँ को वरियताएँ लिखा है। इसे भी ठीक करवाने के लिए डाक लिख रहा हूँ!

अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह!

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17:17 बजे आलोक द्वारा।
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गूगल सुझाव, टेक्नोलॉजी, अश्लीलता, और प्रयोक्ता का अनुभव - सुधारना आपके हाथ में है

यह शीर्षक आपको कुछ दिन पहले विनीत खरे जी के लेख के शीर्षक जैसा लगेगा, और यह इसलिए क्योंकि यह लेख उसी पान की दुकान वाले लेख से संबंधित है। इस "समस्या" को देखने के लिए आपको

  1. हिन्दी वाला गूगल लागू करना होगा, पर
  2. खोज अंग्रेज़ी अक्षर s से करनी होगी - वैसे आप स से करें तो भी परिणाम वही होगा :
यानी वयस्कोन्मुख सामग्री को इंगित करने वाले शब्द सुझाए जा रहे हैं।

यही हाल कुछ और अक्षरों की खोज करने पर होता है।

क से ले कर,

फ से ले कर

ब तक।

मेरे द्वारा ली गई तस्वीरें करीब एक महीने पुरानी हैं इसलिए हो सकता है कि आपको इस वक़्त कुछ और परिणाम मिलें।

वास्तव में यह खोज मैंने दफ़्तर में की थी, s से कुछ खोज कर रहा था - स से नहीं - और परिणामों के सुझाव आने लगे, उत्सुकता हुई और तस्वीरें सँजो के रख लीं।

यह है तो समस्या ही, आखिरकार सुझाव तो ठीक है पर देश और काल के आधार पर नैतिकता बदलती है कि नहीं?

विनीत जी का लेख देखने के बाद, और उसपर लिखी टिप्पणियों से यही लगा कि हाँ वास्तव में इन शब्दों की खोज अधिक होती है इसलिए यह सुझाव में आए हैं। कुछ लोगों ने इसे सहज भाव से लिया और कुछ ने नहीं, जैसे कि स्वयं विनीत जी ने।

और सहज भाव से न लेना भी स्वाभाविक ही है, यह भाषा और संस्कृति से इतर है, आप किसी गंभीर विषय पर खोज कर रहे हों और सुझाव ऐसे आने लगें, जब कि आसपास लोग भी बैठे हों तो कैसा रहेगा?

अंग्रेज़ी वाले गूगल में तो सुझाव हमेशा नहीं आते पर हिन्दी वाले में तो हमेशा आते हैं!

बस एक बार अंग्रेज़ी वाले गूगल के जरिए आजमा के देखा - http://google.com/webhp?complete=1&hl=en से अंग्रेज़ी वाले गूगल में सुझाव आते हैं।

और यही पाया कि, अंग्रेज़ी में गूगल अश्लील सुझाव खा गया,

जी हाँ बिल्कुल खा गया,

दुबारा खा गया -

यहाँ भी वयस्कोन्मुख सुझाव नहीं दिखे,

न यहाँ,

बिल्कुल भी नहीं,

यहाँ थोड़े हैं।

वास्तव में हो क्या रहा है? मैंने एक बार विकल्प में जा के वयस्कोन्मुख सामग्री न हटाने का विकल्प भी चुनने की कोशिश की - वयस्कोन्मुख सामग्री हटाने का विकल्प लागू नहीं था।

यानी क्या? यानी यह, कि गूगल ने मामले की संजीदगी को समझते हुए वयस्कोन्मुख और संभवतः आपत्तिजनक सुझाव हटा दिए हैं - अंग्रेज़ी के लिए कम से कम।

पर फिर हिन्दी में क्यों नहीं? शायद इसलिए कि अभी गूगल हिन्दी सीख रहा है। वैसे, शायद कुछ सुझाव हिन्दी में भी हटाए गए हैं, क्योंकि मैं चकित हुआ था कि च के लिए वयस्कोन्मुख सुझाव नहीं थे - मतलब कि यह बाला अभी हिन्दी सीख रही है!

विनीत जी ने बात बहुत वाजिब उठाई है, और इस वक़्त हिन्दी के लिए जो सुझाव गूगल पर दिख रहे हैं वह वास्तव में अपरिमार्जित हैं और खोज की आवृत्ति के आधार पर हैं, स्वचालित। लेकिन शायद आपत्तिजनक सुझावों को हटाने की प्रक्रिया अभी उतनी सशक्त नहीं हुई है। लेकिन यह प्रक्रिया मौजूद तो है - यह ज़ाहिर होता है च वाले सुझावों से। इस बारे में गूगल को लिख रहा हूँ, शायद वे इसे और सशक्त करने पर गौर करें।

पर तीन बातें अवश्य सामने आती हैं -

  1. अभी भी बहुत कम लोग गूगल के स्थल के हिन्दी उद्धरण का इस्तेमाल करते हैं। तभी यह मुद्दा अभी तक उछला नहीं। इस्तेमाल करिए - इसके लिए आप वरीयता या प्रिफ़रेंसेज़ में जा सकते हैं। गूगल वाले नज़र रखते हैं कि कौन सी भाषा के पन्नों का इस्तेमाल अधिक हो रहा है। हिन्दी के इस्तेमाल की संख्या बढ़ाइए। हिन्दी के जालस्थलों को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी आपकी है उनका इस्तेमाल करके, और उनपर प्रतिक्रिया दे के। इस काम में भारत सरकार या किसी देवी देवता का कोई जिम्मा नहीं है, यह उत्तरदायित्व आपका है।
  2. जिस व्यक्ति को हिन्दी टंकण आता है उसके लिए S अक्षर छापने पर देवनागरी के परिणाम दिखाना - मुझे तो नहीं जमता, अगर इसे वैकल्पिक बनाने की सुविधा हो तो अच्छा हो। वैसे सुझाव स से भी आते हैं। पर इस समय हिन्दी टंकण न जानने वालों की संख्या कम है अतः यह समस्या इस समय काफ़ी गौण है।
  3. गूगल वालों ने अपने मुख पृष्ठ पर वरीयताएँ को वरियताएँ लिखा है। इसे भी ठीक करवाने के लिए डाक लिख रहा हूँ!

अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह!

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09:11 बजे आलोक द्वारा।
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5.6.08

ये http और www क्या है? क्या http माने जालस्थल और www माने चिट्ठा?

पिछले कुछ दिनों में कुछ लेख पढ़ने को मिले जिनसे ऐसा लगा कि इस www और http के बारे में खुलासा देना ज़रूरी है। आखिरकार आप स्वादिष्ट भोजन खाते हैं, तो यह उत्सुकता तो होती ही है न कि उसमें डाला क्या गया है? पकाया कैसे गया है? उसी तरह भले ही आप केवल जालस्थलों के पाठक हों, या केवल चिट्ठा चलाते हों तो भी यह पता होना अच्छा ही है कि किसी भी जालस्थल के पते के मायने क्या हैं। दरअसल जब तक मैं भी केवल खाता ही था, पकाता नहीं था, इन सब शब्दों के बारे में मुझे भी कई भ्रान्तियाँ थीं, और इन भ्रान्तियों के चलते मैंने कई लोगों को अनजाने में ही सही, पर गुमराह भी किया है।

इसलिए यह वाजिब ही है कि इस विषय में अब तक जो सीखा है उसे आपके सामने रखूँ और इस सिलसिले में और ज्ञान भी पाऊँ।

पहले समझते हैं कि यूआरऍल - यूनिफ़ार्म रिसोर्स लोकेटर - "संसाधनों के समरूपी पते" के क्या अंश होते हैं, एक उदाहरण के साथ।

http://translate.google.com/translate_t/?langpair=hi|en
  1. पहला हिस्सा - http:// - है प्रोटोकॉल। यह बताता है कि इस पते तक पहुँचने के लिए आपके ब्राउज़र को किस कंप्यूटरी भाषा का प्रयोग करना होगा। एक तरह से, यह वास्तव में पता नहीं है, श्री, सुश्री की तरह सम्बोधन जैसा है।
  2. दूसरा हिस्सा - पहली बिन्दु तक - translate - यह उपडोमेन है। इसके बारे में थोड़ी देर में, पहले तीसरे हिस्से को समझ लें।
  3. तीसरा हिस्सा - पहले / तक - google.com - यह डोमेन है। डोमेन वास्तव में एक (अधिकतम १२ अंकों की) संख्या होता है, पर इंसानों को नंबर से ज़्यादा नाम याद रहते हैं, इसलिए डोमेन नामों का प्रचलन है। इस १२ अंक की संख्या को आईपी कहते हैं। और आईपी से डोमेन नाम तथा डोमेन नाम से आईपी पता लगाने की निर्देशिका का काम डोमेन नाम सर्वर करते हैं। इसे डीएनएस प्रबन्धन भी कहा जाता है।
  4. चौथा हिस्सा - ? तक - translate_t/ - यह पथ है। जालस्थल जिस सर्वर पर है, वहाँ अलग अलग फ़ाइलें अलग अलग निर्देशिकाओं में होती हैं। उनका पथ डोमेन नाम के ठीक बाद रहता है।
  5. पाँचवाँ हिस्सा - ? के बाद - langpair=hi|en - परिमाण हैं। किसी पथ पर मौजूद फ़ाइल को कोई और परिमाण प्रदान करने हों तो इसका इस्तेमाल होता है।

आइए अब समझते हैं कि http क्या है और www क्या है। http तो वास्तव में संबोधन ही है, पता नहीं है। http के अलावा ftp, news, file, https आदि संबोधन भी होते हैं। किसी भी जालस्थल के लिए http या https का संबोधन ही लगेगा। आपने देखा होगा कि यदि आप अपने ब्राउज़र में अगर http:// नहीं लिखते हैं तो भी वह स्वतः ही आगे श्री या सुश्री की तरह http:// चेंप देता है।

www - ऊपर दिए गए उदाहरण में दूसरा अंश - उपडोमेन का है। जिस प्रकार ऊपर translate एक उपडोमेन है, उसी तरह www भी एक उपडोमेन का नाम हो सकता है। उपडोमेन का यह लाभ है कि एक ही डोमेन नाम लेने के बावजूद आप पाँच छः अलग अलग सर्वरों पर अलग अलग उपडोमेन रख सकते हैं। अगर आप चाहें तो एक का दूसरे से वास्ता भी नहीं हो। उदाहरणार्थ, blogspot.com वालों ने एक ही डोमेन का पैसा दे के अलग अलग प्रयोक्ताओं को अलग अलग उपडोमेन में चिट्ठे बनाने की सुविधा दी है। उपडोमेन होना अनिवार्य नहीं है, अगर आप अपने डोमेन पर एक ही स्थल चाहते हैं तो कोई आवश्यक नहीं है कि उपडोमेन रहे।

तो फिर यह www है क्या?

एक परंपरा सी बन गई है कि अगर किसी स्थल का उपडोमेन न हो तो उसका उपडोमेन www मान लिया जाता है। इसीलिए, अधिकतर डीएनएस प्रबन्धक आजकल www.example.com और example.com दोनो को एक दूसरे का पर्यायवाची बनाने का विकल्प देते हैं। यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन पाठकगण यह उम्मीद करते हैं कि www.example.com और example.com एक ही चीज़ होगी इसलिए यह परंपरा चल पड़ी है।

क्या http: का मतलब चिट्ठा, और www का मतलब जालस्थल?

जी नहीं। चिट्ठा वास्तव में है क्या? एक खास प्रारूप में जानकारी प्रदान करने वाला जालस्थल ही तो। और कुछ नहीं।

http का इस्तेमाल तो हर जालस्थल को पुकारने के लिए होगा - चाहे वह चिट्ठा हो या नहीं। यह मात्र संबोधन है। www एक उपडोमेन है, पारंपरिक उपडोमेन, जो किसी भी डोमेन के आगे लगाया जा सकता है। चाहें वह डोमेन चिट्ठे का हो या किसी और स्थल का।

एक उदाहरण के साथ समझते हैं।

अगर आप

तो एक ही पन्ना खुलता है - क्योंकि www और बिना उपडोमेन वाल स्थल हैं तो अलग अलग, लेकिन एक ही जगह अग्रेषित किए गए हैं।

लेकिन ऍडसेंस निर्माता गोकुल राजाराम के स्थल, पर देखिए -

उन्होंने यह अग्रेषण लागू नहीं किया है! यह अग्रेषण करना ज़रूरी नहीं है, बस पाठकों के लिए सुविधाजनक है इसलिए इसकी परंपरा बन गई है।

आशा है अब चश्मे के बाहर लगी धूल साफ़ हो गई होगी।

या उँगलियों के निशान रह गए हैं?

पुनश्च - पिछले सन्देश के बारे में बाल किशन जी ने पूछा है कि क्या मैं उनकी डोमेन, डाक पते आदि संबधी मदद करूँगा क्या। जवाब यही है कि जी हाँ बिल्कुल। और केवल बाल किशन जी ही नहीं, यदि आप में से किसी और को भी कोई प्रश्न हों तो बेधड़क पूछें।

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02:11 बजे आलोक द्वारा।
6 छींटाकसी
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3.6.08

सिर्फ़ पाँच मिनट और चार कदमों में अपने पते को meraanaam@gmail.com के बजाय mera@meraanaam.in करें, और पुराना पता भी जारी रखें

आइए आज देखते हैं कि आप अपने फ़ोकटी जीमेल के पते के बजाय अपने डोमेन वाले पते का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं। और वह भी पुराना पता गँवाए बगैर।

  1. आपको एक डोमेन खरीदना होगा। .इन डोमेन ८०० रुपए सालाना में मिलते हैं।
  2. इसके बाद अपने डोमेन के डीऍनऍस प्रबन्धन में जा के मेल फ़ॉर्वर्ड का विकल्प चुन लें। मैंने ज़ोनएडिट का इस्तेमाल किया है।
  3. इसके बाद इस प्रकार जानकारी प्रदान करें। - * @ meraanaam . in is forwarded to meraanaam @ gmail . com और जोड़ दें।
  4. आपको चेतावनी दी जाएगी, Are you sure you want to do this? This will delete your MX records. यहाँ पर हाँ चुनें और आगे बढ़ें।

हो गया काम। ऊपर * देने का अर्थ है कि इस डोमेन की सारी डाक एक ही पते पर अग्रेषित की जाए। अगर आप कोई खास नाम चाहते हैं तो * के बजाय कुछ और दें जैसे कि अपना नाम। ऐसा करने से केवल meraanaam@meraanaam.in को भेजी डाक आपतक पहुँचेगी पर kuchhbhi@meraanaam.in वाली डाक आप तक नहीं पहुँचेगी। एक से अधिक प्रविष्टियाँ भी डाल सकते हैं।

अब, आप अपनी जीमेल की डाक पेटी में, अपनी जीमेल वाली डाक के साथ साथ, meraanaam . इन वाली डाक भी पा सकेंगे।

यह तो हुई डाक प्राप्त करने की बात। लेकिन उसी पते से डाक भेजेंगे कैसे? चार कदम और –

  1. अपने जीमेल खाते में सेटिंग्स पर जा के “खाते” वाले खाँचे में जाएँ – अंग्रेज़ी में यह ऍकाउण्ट्स के नाम से मिलेगा।
  2. यहाँ पर अपना नया डाक पता भी प्रविष्ट कर दें। आपसे पुष्टि करने को कहा जाएगा, कुछ समय बाद पुष्टि डाक आएगी, पुष्टि कर दें कि यह पता आपका ही है।
  3. पत्रोत्तर/उत्तरापेक्षी – में आप विकल्प चुन सकते हैं कि जिस खाते से डाक आई है, उसी नाम से जवाब भी दिया जाए। इस प्रकार, @gmail वाली डाक का जवाब @gmail से ही, और @meraanaam वाली डाक का जवाब @meraanaam से ही दिया जा सकता है।
  4. नई चिट्ठी लिखने का प्रयास करें। अब आपको प्रेषक वाले कोष्ठक में भी विकल्प मिलेगा, कि किस नाम से डाक भेजनी है। आप खाते के जमाव में यह भी तय कर सकते हैं कि किस पते को वरीयता दी जाए, ताकि आप फ़टाफ़ट अपनी इच्छानुसार, जीमेल या अपने नाम वाली डाक भेज सकें।

बस, हो गया काम। अब हम होते हैं नौ दो ग्यारह। कूटशब्द एक ही याद रखना है, डाक जाँचने के लिए बस एक ही जगह देखना है, लेकिन आएगी दोनो जगहों से!

कुछ और नुस्खे, वैकल्पिक –

  1. आप चाहें तो एक नज़र में पता लगा सकते हैं कि डाक कौन से खाते से आई है। इसके लिए छननी बना लें – यदि प्राप्तकर्ता @ meraanaam . in है तो उसपर चिप्पी लगा दें, और चिप्पी को अलग रंग दे दें।
  2. अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी जीमेल के बजाय @meranaam .in का इस्तेमाल करना शुरू कर दें, तो बस हर डाक का जवाब @meraanaam .in वाले पते से देना शुरू कर दें। धीरे धीरे वही अधिक प्रचलित हो जाएगी, और जीमेल वाली डाक तो आपके पास आएगी ही।
  3. abuse@ meraanaam .in , postmaster@ meraanaam .in पर खास नज़र रखें, इनके लिए जीमेल में अलग छननी बना के रख सकते हैं।
  4. अपने जालस्थलों और चिट्ठों और हस्ताक्षर में नया पता लिखना न भूलें!

है न पाँच मिनट का काम?

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15:24 बजे आलोक द्वारा।
4 छींटाकसी
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30.5.08

डोमेन तो ठीक है, पर ये सीनेम क्या है? अपने डोमेन पर ब्लॉगर.कॉम वाला चिट्ठा चढ़ाने के बारे में थोड़ा और विस्तार से

पिछले लेख में अपने डोमेन पर ब्लॉग्स्पॉट.कॉम वाले चिट्ठे को चढ़ाने के बारे में जो टिप्पणियाँ आई हैं उससे लगता है कि अब बहुत लोग इस सुविधा का इस्तेमाल करने में दिलचस्पी रखते हैं।

पिछले लेख में कुछ लोगों को यह नहीं समझ आया था कि पहला कदम - डोमेन खरीदना - और तीसरा कदम - ब्लॉग्स्पॉट को डोमेन के बारे में बताना - के बीच में क्या करना है। मुझे भी पहली बार नहीं समझ आया था। अमित और विपुल ने इस मामले में शुरुआत में मेरी काफ़ी मदद की थी, तो अब वही जानकारी विस्तार से आप लोगों के लिए।

जब आप डोमेन खरीदेंगे तो आपको एक कड़ी दी जाएगी जिसमें अपने डोमेन से संबंधित कुछ बदलाव - जैसे नाम, पता, डाक पता आदि - करने की सुविधा होती है। उसी में एक विकल्प है नेमसर्वर बदलने का।

अगर आप आतिथ्य - होस्टिंग - भी खरीदते हैं तो आपको अपने होस्ट का नेमसर्वर यहाँ लगाना होगा, लेकिन हमें इस काम के लिए होस्टिंग नहीं चाहिए, होस्टिंग तो ब्लॉगर.कॉम वाले ही कर रहे हैं, वह भी मुफ़्त में, हमारा तो सिर्फ़ नाम है - इसलिए हमें अपने नाम के लिए एक एलियास बनाना होगा - यानी meranaam.in बनाम गूगल।

इसी बनाम करने की प्रक्रिया को CNAME बनाना कहते हैं।

CNAME जोड़ने का एक तरीका यह है -

  1. http://zoneedit.com में एक खाता खोलें। खाते में वही डाक पता दें जो आपने डोमेन पंजीकरण के समय दिया था। इससे ज़ोनएडिट को पुष्टि होगी की आपका ही स्थल है।
  2. यहाँ पर अपने खरीदे हुए डोमेन को एक ज़ोन बना दें। यह बनाने के बाद ज़ोनएडिट बताएगा कि आपको अपने डोमेन के नेमसर्वर में किन दो नेमसर्वरों के नाम डालने हैं।
  3. अपने डोमेन प्रदाता की कड़ी पर जा के ज़ोनएडिट वाले नेमसर्वर वहाँ प्रदान कर दें।
  4. इसके बाद, एलियास जोड़ दें, जैसे मैंने एक स्थल के लिए जोड़े हैं - काले वाले हिस्से में meranaam होगा - आपके डोमेन का नाम। अगर आपके कई चिट्ठे हैं तो आप कई CNAME जोड़ सकते हैं, अगर एक ही है और उसका नाम meranaam.in ही रखना चाहते हैं तो meranaam के पहले कुछ लगाने की ज़रूरत नहीं है। यह करके इसे सँजो लें। ज़ोनएडिट

बस हो गया काम।

अब, जब भी कोई आपके स्थल पर जाने की कोशिश करेगा, तो पहले आपके डोमेन के नेमसर्वर पढ़े जाएँगे। पता लगेगा कि यह तो ज़ोनएडिट के हैं, ज़ोनएडिट फिर एलियास की बदौलत पाठक को सही जगह भेज देगा, लेकिन आपके स्थल पर यूआरएल में डोमेन आपका ही दिखेगा। ज़ोनएडिट की सेवा बिल्कुल मुफ़्त है।

वैसे तो कुछ डोमेन प्रदाता भी इस प्रबन्धन की सुविधा देते हैं - ताकि ज़ोनएडिट पर जाना न पड़े। डोमेन प्रदाता द्वारा दी कड़ी पर सत्रारंभ करके एक बार देख लें कि ऐसी सुविधा वही दे रहा है क्या - तो काम और आसान हो जाएगा।

अगर आपको ज़्यादा कुछ समझ न आया हो तो कृपया पहले पिछला लेख पढ़े लें।

उम्मीद है आप लोग दाल चावल अलग कर पाएँगे अब। अगर नहीं तो लिखें! अब हमें है दफ़्तर जाना, हम होते हैं नौ दो ग्यारह।

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08:51 बजे आलोक द्वारा।
4 छींटाकसी
इस लेख के हवाले
29.5.08

3 कदमों और 800 रुपए सालाने में अपने डोमेन पर अपना चिट्ठा चढ़ाएँ - बाकी सब कुछ वैसा ही जैसा ब्लॉग्स्पॉट पर। है न आसान? बन गई पहचान!

  1. रीडिफ़ पर जा के एक डोमेन खरीदें।* जैसे कि meranaam.in, कीमत करीब 800 रुपए सालाना।
  2. डोमेन में CNAME प्रविष्टि डालें - ताकि example.in पहुँचे ghs.google.com पर। आधिकारिक जानकारी
  3. ब्लॉगर.कॉम के खाते में सेटिंग्स -> प्रकाशन पर जा के, "कस्टम डोमेन" को चुनें। देखें - उसके बाद, "उन्नत सेटिंग्स पर जाएँ" और अपना डोमेन नाम दे के सँजो लें। देखें -

बस! आपका चिट्ठा puraanaanaam.blogspot.com के साथ साथ अब meranaam.in पर भी दिखेगा!

* कुछ अपेक्षित शकों और सवालों के जवाब -

आप चाहें तो पहले अपने डोमेन का उपडोमेन बना सकते हैं और फिर उस उपडोमेन के लिए सीनेम दे सकते हैं, जैसे कि bakbak.meranaam.in - ताकि यदि चाहें तो अपने डोमेन के बाकी हिस्से पर बाद में कुछ और डाल सकें।

जीता जागता उदाहरण - चिट्ठाजगत का आधिकारिक चिट्ठा - http://chittha.chitthajagat.in - इसी विधि से ही प्रकाशित होता है!

कोई और शक या सवाल?

पुनश्च - रामचन्द्र मिश्र जी का http://hindi.rcmishra.net/ भी इसी सेवा के तहत चलता है।

पुनश्च २ - कुछ जानकारी अगले लेख में भी है।

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06:30 बजे आलोक द्वारा।
11 छींटाकसी
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