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Can't see Hindi?

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9.1.09

आज के दस सत्य

  1. मैं अपनी कंपनी में सौ रुपए लगाता हूँ तो ३ रुपए फ़ायदा होता है। जबकि बैंक में पैसा जमा कराऊँ तो भी कम से कम ६ फ़ीसदी तो मिलेगा ही मिलेगा। मैं महान हूँ जो इतने कम फ़ायदे - बल्कि घाटे - पर ५२ हज़ार लोगों को नौकरी दे रहा हूँ।
  2. मुझे पता था कि मेरे इस्तीफ़े के बाद मेरी कंपनी के शेयर पिटेंगे लेकिन फिर भी मैंने अपने बेटे से कहा कि पुत्र, कुछ फ़ायदा मत कमाना। अब वह मेरी बात न माने तो मैं क्या करूँ। लेकिन जिन नौकरों को मैंने शेयर बाँटे थे उनकी वाट लगती है तो लगने दो।
  3. मेरे घर वालों, मेरी कंपनी के बोर्ड, किसी को भी नहीं पता कि यह सब चल रहा था। (मेरे वकील ने कहा था कि यह ज़रूर बोलना)
  4. पिछले जितने सालों में जब भी मेरी कंपनी के शेयर ऊपर उठे, मैंने या मेरे परिवार ने कभी भी कोई फ़ायदा नहीं कमाया। (सब दान दे दिया था)
  5. मैं एक आलीशान घर में रहता हूँ जिसके चारों ओर दस फ़ुट ऊँची दीवार है (पैतृक संपत्ति है)।
  6. मेरे बाप के पास भी काफ़ी पैसा था और मेरे पास भी है, मेरी बिरादरी वालों को पास भी। सभी नेताओं के साथ मेरी दोस्ती है। सही समय पर सही झूठ बोल के जब तेलगी जैसे बच सकते हैं तो मैं क्यों नहीं।
  7. अगर यही काम मेरे दफ़्तर में काम करने वाला करता तो उसे एक ही दिन में लात मार के बाहर निकाल देता, भले ही उसने कितने घंटों दिन रात मेरे लिए पैसा पैदा करने के लिए काम किया हो। (एक खोजो दस मिलेंगे)
  8. यह कंपनी मेरी है, बाकी सब मेरे नौकर और कुत्ते हैं जो मेरे आगे पीछे दुम हिलाते हैं। उनके पदों पर मत जाइए, वह सब क़ानूनन करना पड़ता है। है तो वह नौकर ही, किसी और के हाथ लगाब-चाबुक देने मैं मुनासिब नहीं समझता, अपना काम करें, और पैसे ले के घर जाएँ। (कंपनी डूब गई तो खेती बाड़ी है ही)
  9. कुछ ठेके मैंने अमरीका में लिए हुए हैं, पर मैं अमरीका नहीं जाऊँगा क्योंकि वहाँ गया तो कुछ दो तीन सौ साल की जेल हो जाएगी। हाँ यहाँ रह कर सब जुगाड़ हो जाएँगे। भूखी नंगी जनता तो मेरे पास नौकरी के लिए आएगी ही।
  10. ठेके लेने के लिए मैं रिश्वत भी देता हूँ और लोगों को अपनी कंपनी के शेयर भी मुफ़्त में बाँटता हूँ।

मतलब मैं तो वही सब करता हूँ जो हिंदुस्तान के सभी धंधेबाज़ करते हैं, फिर पता नहीं मेरे शेयर ही क्यों पिट रहे हैं? लगता है यहाँ कलियुग पूरी तरह आया नहीं है।

सत्य वचन!

३९ के भाव पे उठा लिया है, कल मोहर्रम की वजह से बाज़ार बंद थे, आज देखते हैं क्या होता है।

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06:59 बजे आलोक द्वारा।
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29.11.07

भारत टेक्स्टाइल

मेरे एक करीबी (करीबी या क़रीबी?) रिश्तेदार कपड़ा उद्योग में काम करते हैं, और आजकल वहाँ - कम से कम निर्यातकों में - मायूसी छाई हुई है, जो माल बेचने का वादा डॉलर के ४६ के भाव पर तय किया गया था, वही अब ३९ में बेचना पड़ रहा है। ऐसी और कपड़ा उद्योग से जुड़ी अन्य कई खबरें भारत टेक्स्टाइल वाले दे रहे हैं। लेकिन खरीद फ़रोख्त की सुविधा में हिन्दी नौ दो ग्यारह है।

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12:59 बजे आलोक द्वारा।
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