इसका एक मतलब तो हम जानते हैं, पर जिस मतलब की यहाँ बात हो रही है, वह है जनरल पब्लिक लाइसेंस यानी आम सार्वजनिक अनुमतिपत्र।
यहाँ पर मैं साफ़ साफ़ एक उदाहरण के साथ बताना चाहूँगा कि जीपीऍल होता क्या है। मैं ग़लत भी हो सकता हूँ, यदि कुछ ग़लत लगे तो बताने से न झिझकें।
समझिए कि आपने एक प्रोग्राम लिखा। आप चाहते हैं कि सारी दुनिया उसका लाभ उठाए। तो आप उसे उठा के जाल पर डाल देते हैं।
बहुत बढ़िया।
आगे क्या होता है?
मान लीजिए आप टपक गए, तो आपके प्रोग्राम का क्या होगा?
यदि कोई और आपके तन्त्रांश को अपना बोल के बाँटना या बेचना शुरू कर दे तो क्या होगा?
इतना ही नहीं, यदि अगला आपको ही अपने बनाए तन्त्रांश को वितरित करने से रोक दे, यह कह के कि ये तो मैंने लिखा था, तो क्या होगा?
यानी कि आपका मन खट्टा होगा, और आप इस तरह के काम करने के लिए उत्साहित होने के बजाय हतोत्साहित हो जाएँगे।
अतः आप जो भी वितरित कर रहे हैं, वह एक अनुमति पत्र के तहत वितरित होना चाहिए जिसमें आप परिभाषित करेंगे कि आपके द्वारा वितरित तन्त्रांश के साथ दूसरे लोग क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते हैं।
इस तरह के कई अनुमति पत्र हैं, और उनमें से एक है आम सार्वजनिक अनुमति पत्र। साफ़ साफ़ शब्दों में इसके मायने ये हैं -
जीपीऍल मुक्त तन्त्रांश सङ्गठन ने बनाया है, उनका नारा है कि तन्त्रांश मुक्त हो। ध्यान दें, मुक्त, मुफ़्त नहीं। मुफ़्त भी हो सकता है, लेकिन अव्वल इसे मुक्त होना चाहिए।
यदि आप किसी तन्त्रांश को इस अनुमति पत्र के अधीन रखते हैं, तो आप यह स्थापित कर रहे हैं कि -तो सङ्क्षेप में, जीपीऍल यह निश्चित करता है कि भले ही आपका स्रोत खुला क्यों न पड़ा हुआ हो, कोई भी उसे चुरा नहीं सकता। इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन यह दावा नहीं कर सकता कि वह उसका है। इसी तरह यह इस बात से भी बचाता है कि मान लो पाँच लोगों ने मिल के कुछ लिखा और उसके बाद उन पाँचों में से एक ने बाकियों को बेदखल कर के नोट छापने शुरू कर दिए। इस प्रकार जीपीऍल भागीदारिता और स्वयंसेवा की भावना को प्रोत्साहन देता क्योंकि सबको पता है कि कोई माल लेके भाग तो सकता नहीं है।
इसका मतलब यह भी है कि कोई बड़ी कम्पनी, जिसे आपका कूट पसन्द आया, बिन्दास आपका स्रोत उठा के उसे अपना बोल के बेचना नहीं शुरू कर सकती है - क़ानूनन। इतना ही नहीं, बतौर निर्माता आप भी उस कम्पनी को अपना व अन्य स्वयंसेवियों की मेहनत से बना स्रोत उठा के बेच नहीं सकते हैं। आपका उत्तरदायित्व सहकर्मियों व प्रयोक्ताओं के प्रति है, अन्य किसी के प्रति नहीं।
इसको लागू करने के लिए बस जीपीऍल की एक प्रति अपने स्रोत के शीर्षक में बतौर टिप्पणी डालने की ज़रूरत है, और कुछ नहीं। यदि प्रति बहुत बड़ी हो, यानी प्रोग्राम छोटा हो, तो इसकी एक कड़ी टिप्णियों में डाली जा सकती है। इसी प्रकार तन्त्रांश का इस्तेमाल करते समय भी यह प्रदर्शित होना चाहिए।
क्रिएटिव कॉमंस का लाइसेंस भी कुछ ऐसा ही है, जीपीऍल ख़ास स्रोत को मद्देनज़र बनाया गया है, उसी प्रकार ऍफ़ डी ऍल ख़ास तन्त्रांश से सम्बन्धित प्रलेखन को मद्देनज़र रख के बनाया गया है। मुक्त तन्त्रांश की दुनिया में जीपीऍल एक जाना पहचाना अनुमतिपत्र है।
सोर्सफ़ोर्ज है तो बड़ा। इसमें कई प्रकार की परियोजनाएँ हैं, लोग भी भर के हैं।
दूसरी ओर सरोवर के छोटे होने में भी कुछ फ़ायदे हो सकते हैं। सरोवर पर भारतीय भाषाओं पर काम करने वाले कई लोग हैं, परियोजनाओं की सूची देखें। साथ ही परियोजनाएँ ज़्यादा नहीं हैं, इसलिए प्रशासकों से मेल जोल बढ़ाने की मौके अधिक हैं। कुछ दिक्कत आ रही हो तो लोग अपनी बात आसानी से सुनेंगे। उनके अन्तरापृष्ठ के अनुवाद का काम भी चल रहा है, हिन्दी में। नुकसान है तो यह कि लोग सरोवर के बारे में जानते कम हैं। लेकिन यदि सही लोग सरोवर के बारे में अधिक जानते हों तो बेहतर ही है।